😍पति को पत्नी का कौन सा👉 अंग नहीं छूना चाहिए ?👎

  • एक शब्द में उत्तर

  • पैर नही छूना चाहिए नाभि और चरण

😍पति को पत्नी का कौन सा👉 अंग नहीं छूना चाहिए ?👎

पति को पत्नी का कौन सा अंग नहीं छूना चाहिए

  • शादी एक परम बंधन होता है जिसमें पति और पत्नी एक-दूसरे के साथ अपने जीवन को बिताते हैं। इस नए परिप्रेक्ष्य में, कुछ महत्वपूर्ण बातें होती हैं जिन्हें समझना और पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि पति को पत्नी का कौन सा अंग नहीं छूना चाहिए ताकि वे एक आदर्शिक और सफल जीवन बिता सकें।

आलेख की आवश्यकता

  • यह सच है कि पति और पत्नी के बीच में विशेष संबंध होते हैं जो उनके परिवारिक और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करते हैं। एक सफल और खुशहाल जीवन के लिए, इन संबंधों को सही तरीके से देखभाल की आवश्यकता होती है। चलिए देखें कि पति को पत्नी के किन-किन अंगों को नहीं छूना चाहिए।

1.  पति को पत्नी का कौन सा हैड

  • पति को अपनी पत्नी के सिर को छूने से बचना चाहिए। सिर एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग होता है जिसे आपको सम्मान देना चाहिए।

2. पति को पत्नी का कौन सा पैर

  • पति को अपनी पत्नी के पैरों को छूने से बचना चाहिए। पैरों को छूना एक प्राकृतिक रूप से अवमानना माना जाता है और यह आपके संबंधों को क्षति पहुंचा सकता है।

3. पति को पत्नी का कौन सा कमर

पति को पत्नी का कौन सा अंग नहीं छूना चाहिए
  • पति को अपनी पत्नी की कमर को छूने से परहेज करना चाहिए। यह भावनात्मक सीमाओं को छूने का काम कर सकता है और उनके बीच की दूरियाँ बढ़ सकती है।

4. व्यक्तिगत स्थानें

  • पति को अपनी पत्नी की व्यक्तिगत स्थानों को छूने से बचना चाहिए, जैसे कि वहाँ के व्यक्तिगत अंग या स्थान। यह गलत संदेश देने का साबण हो सकता है और इससे व्यक्तिगत अवस्था को क्षति पहुंच सकती है।

5. आत्मा की भावनाएँ

  • पति को अपनी पत्नी की आत्मा की भावनाओं को समझने और संवेदनशीलता दिखाने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन उन्हें उनकी आत्मा को छूने से बचना चाहिए।

6. व्यवसायिक निजता

  • पति को अपनी पत्नी की व्यवसायिक निजता का आदर करना चाहिए और उनकी योग्यता को मानना चाहिए, लेकिन वे उनकी निजता को छूने से बचने की कोशिश करें।

7. सामाजिक सम्बन्ध

  • पति को अपनी पत्नी के सामाजिक संबंधों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन उन्हें छूने से बचना चाहिए।

8. स्वास्थ्य स्थिति

  • पति को अपनी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति की देखभाल करनी चाहिए, लेकिन वे उनकी स्वास्थ्य के अंगों को छूने से बचें।

9. भविष्य की योजनाएँ

  • पति को अपनी पत्नी के साथ भविष्य की योजनाओं को साझा करना चाहिए, लेकिन उनके भविष्य के अंगों को छूने से बचना चाहिए।

10. आत्मविश्वास

  • पति को अपनी पत्नी के आत्मविश्वास का समर्थन करना चाहिए, लेकिन वे उनके आत्मविश्वास के अंगों को छूने से बचें।

11. व्यक्तिगत दौरा

  • पति को अपनी पत्नी के व्यक्तिगत दौरे का समर्थन करना चाहिए, लेकिन उनकी व्यक्तिगतता के अंगों को छूने से बचना चाहिए।

12. समय की महत्वपूर्णता

  • पति को अपनी पत्नी के साथ बिताए गए समय की महत्वपूर्णता को समझना चाहिए, लेकिन उनके समय के अंगों को छूने से बचना चाहिए।

13. आदर और सम्मान

  • पति को अपनी पत्नी के प्रति आदर और सम्मान की भावना रखनी चाहिए, लेकिन उन्हें उनके शरीरिक अंगों को छूने से बचना चाहिए।

14. आत्मिक संवाद

  • पति को अपनी पत्नी के साथ आत्मिक संवाद को समझना चाहिए, लेकिन उनके आत्मिक अंगों को छूने से बचना चाहिए।

15. सहयोग और साझेदारी

  • पति को अपनी पत्नी के साथ सहयोग और साझेदारी का अहसास करना चाहिए, लेकिन उनके शारीरिक अंगों को छूने से बचना चाहिए।

news

  • उंगलियों पर नाचने वाले पति कहाँ मिलते हैं?

  • कहीं भी नही, आपको पहले एक सामान्य पति से शादी करनी होगी और फिर जैसे एक जौहरी हीरे को तराशता है, उसे आपको उंगलियों वे नाचने वाला पति बनाना होगा।

    और हाँ एक और बात एक समझदार पत्नी अपने पति को राजा बनाती है जिसे वो खुदबखुद रानी बन जाती है,

    और एक नासमझ पत्नी पति को नौकर बनाकर रखती है और खुद बन जाती

  • ऐसा कौन सा अंग है जो पत्नी पति को नहीं छूने देती?

  • पत्नी अपना पैर कभी नहीं छूने देती है अपने पति को कहा जाता है कि पाप लगता है
  •  भारतीय संस्कृति और भारतीय धर्म के अनुसार पत्नी अपने पति को अपना पर कभी नहीं छूने देती।
  • इस प्रश्न का यह जवाब है कि पैर ही वह शरीर का अंग है जो पत्नी अपने पति को नहीं छूने देती

स्त्रियों के कौन से पति को पत्नी का कौन सा अंग में पति का भविष्य छिपा होता है?

पति को पत्नी का कौन सा अंग नहीं छूना चाहिए
  • पति /पुरुष का भविष्य स्त्री के सर्वांग मेंं भविष्य छिपा है ।विशेष कर पुरुष का भाग्य उसके अपने हाथ में और जिस स्त्री से उसका जुड़ाव है ( माँ पत्नी पुत्री ) उस /उन स्त्रियों के पैरों में छिपा होता है । स्त्री मां रूप से पुरुष के अंश भावी पुरुष उसके बेटे को अपनी सोच विचार इच्छा वासनाओं के अनुसार ढालकर नये पुरुष का निर्माण करती है जो अधिकांशतः अपने बाप के विपरीत विरोधी होता है यदि मां जागरूक हो तब , यदि मां जागरूक नहीं है तो उसका पुत्र अपने पिता के समान उसकी डुप्लीकेट कापी अपने को अपने आप बनाता है ।

    स्त्री पत्नी रूप में पुरुष के पति रूप को हर हाल में अपनी सोच विचार इच्छा वासनाओं के अनुसार बदलकर अपने अनुसार करके ही उसके साथ अपना जीवन निर्वाह करती है यदि वह मां के पुत्र को अपनी इच्छाओं वासनाओं के अनुसार नहीं बदल पाती है तो उस मां के पुत्र को त्याग कर/तलाक देकर अपना जीवन यापन अपनी इच्छाओं के अनुसार जीया करती है । शादी के बाद स्त्री सिर्फ अपने नाम का त्याग त्याग करती है अहम् वर्चस्व कायम रहता है ,

 

  • जबकि पुरुष केवल अपने नाम को अपने अहम वर्चस्व के साथ चिपका कर रहता है लेकिन उसे अपना जीवन अपनी पत्नी /स्त्री की की सोच विचार बुद्धि से तालमेल बिठाकर जीना पड़ता है ।
  • पति को पत्नी का कौन सा इसे एक स्त्री पत्नी के द्वारा दूसरी स्त्री मां के पुरुष /बेटे को उसकी मां से छीनना अलग-अलग करना कहते हैं जिससे सास बहू की जगप्रसिद्ध राड़ /घर घरों की लड़ाई-झगड़े के रूप में नजर आती है । जिसमें जीत पत्नी की होती है और मां की सदैव हार होती है जिससे एक स्त्री मां से उसका बेटा उसके हाथ से फिसलकर दूसरी स्त्री पत्नी के खेमे /पाले में चला जाता है ।
  • मां मलाल से हाथ मलती /कुसमुसाती रहती है और पत्नी अपनी सास को चिढ़ाती हुई अपने जीवन को अपनी इच्छाओं के अनुसार सास को चिढ़ाती हुई जीती है ।मनुष्य के शरीर का निर्माण भी स्त्री के शरीर के अनुसार होता है ,जीवविज्ञान के साईटोप्लाजमिक इनहैरिटैंस के अनुसार पुरुष में ऊर्जा पैकेट इकाई माईट्रोकोन्डिया माँ से आते हैं ,पिता से माईट्रोकोन्डिया नहीं आते हैं ।निषेचन क्रियान्वयन के समय पिता के माईट्रोकोन्डिया नष्ट हो जाते हैं ।जिससे पुरुष का ऊर्जा स्तर उसकी कार्य क्षमता दक्षता उसकी माँ के अनुसार होती है ,पिता के अनुसार कार्य क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर नहीं होता है ।

    अब पत्नी जो पुरुष की अर्धांगिनी कही गई है उसके अनुसार पत्नी और पत्नी से उत्पन्न संतान पर पुरुष का भोग भाग्य मान अपमान यश अपयश निरभर करता है ।पत्नी जो सभी ग्रहस्थ कार्यों की संचालिका होती है ,

  • वह शादी के बाद अपनी सभी पहचान अपने आप अपने हाथ से समाप्त करके सभी शुभ अशुभ यश अपयश कार्य का भार पति के सिर पर डाल कर निशचिंत /बेफिक्र रहती है ।जिस कारण से वह निकम्मी आलसी उज्जड संतान के दुख दायी कार्य में 50 % की हिस्सेदारी होते हुए भी अपनी संतान के अप्रिय घटना कार्यों से हिंसित नहीं होती है ।
  • पति को पत्नी का कौन सा बेटा बेटी अप्रिय कार्य करेंगे तो बाप की हिंसा /पिटाई होती है माँ की नहीं ,जबकि संतान के जन्म की 100 % प्रत्यक्ष जिम्मेदार होते हुए भी 50 % जिम्मेदार कही जाती है और 50 % जिम्मेदार होते हुए भी संतान के अप्रिय कार्यों से हिंसित नहीं होती , सारा दोष पिता /बाप के सिर लगाया जाता है ।
  • कितनी समझदार है पत्नी प्रत्यक्ष कर्ता होने पर भी अकर्ता बन कर दोषी होने पर भी निर्दोष बनी रहती है । अपनी पहचान और जिम्मेदारी छिपाना और छिपकर मौज लेना यह पत्नी की विशेष खूबी है । अब सबाल कितना सोच समझकर डाला है ? पुरुष का भाग्य स्त्री के किन अंगों पर निर्भर करता है ? दाद देनी पड़ेगी पत्नी की विद्वता की और पुरुष की ना समझी की ;-ऊँचा मस्तक/माथा , लम्बी मछलिया आँख ,या हिरणी जैसी , लेकिन गोल न हों , गोल चेहरा ,तिकोनी ठुड्डी , कछुआ जैसे बीच में से उठे हुए दाँत छोटे दाँत , धनुषाकार होठ , चिकनी पतली चमकदार त्वचा ,उन्नत उठे हुए स्तन , कमर से बड़ी चौड़ी तागड़ी ,पेट में दबी हुई गहरी नाभि , सूंड समान हाथ पैर जघन क्षेत्र बाहुक्षेत्र भारी भुजा क्षेत्र टाँग क्षेत्र हल्का लेकिन कमजोर नहीं ,
  • पति को पत्नी का कौन सा नाखून चिकने गुलाबी उठे हुए ,खड़ी हुई मुद्रा में सर्वांसम दिखे गरदन झुकी हुई न हो पेट लटका हुआ न हो बाहर न निकला हुआ हो टाँगे शरीर से बाहर न निकली हुई हो , पैर का अगूंठा पंजे में अगुलियों से आगे निकला हुआ हो ।ये सभी राजसी स्त्रियों के शुभ लक्षण कहे गए हैं जो इन्द्राणी स्त्रियों में पाये जाते हैं ।उपरोक्त सभी लक्षण शरीर के हैं यदि शरीर राजसी लक्षण युक्त है परन्तु शरीर का नियंत्रक मस्तिष्क में राजसी विचार ना हों तो ऐसा शुभ श्रेष्ठ लक्षणों वाला शरीर किस काम का , जिसके नियंत्रक मस्तिष्क में शरीर के अनुसार विचार न होकर शरीर के विपरीत विरुद्ध विकृत मानसिकता पूर्ण क्रूरता दुष्टता बझ्रबुद्धि के तामसिक विचार भरे पड़े हो ;॥ अतः शरीर लक्षण पर ध्यान देने से बेहतर है मन बुद्धि व्यवहार की पहचान उत्तम है।जिनसे शरीर नियंत्रित रहता है ।

    गोरे रंग से काला रंग श्रेष्ठ है काले रंग वालों में वाईल्ड जीन्स होने से इनकी हड्डियाँ मजबूत होती हैं रोगविरोधक शक्ति अधिक होती हैं , प्रोटीन निर्माण क्षमता ज्यादा होने से बाल अधिक आयु तक काले बने रहते हैं ।शरीर का ऊर्जा उत्पादन स्तर गोरों की तुलना में तेज होने से ये ऊर्जा वान ,फुर्तिली ,इनर्जैटिक होती हैं । लम्बे समयावधि तक टिकाऊ होती हैं ,गोरी की तुलना में देर से बुढ़िया होती हैं ।

समापन

  • इस लेख में हमने देखा कि पति को पत्नी के किन-किन अंगों को नहीं छूना चाहिए। यह संबंध और व्यक्तिगत जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और इन्हें सही तरीके से समझने के लिए आवश्यक है। यदि पति और पत्नी एक-दूसरे के साथ सहयोग, समर्थन और सम्मान के साथ रहते हैं, तो उनका जीवन खुशहाल और सफल हो सकता है।

Leave a comment

Exit mobile version