भाई बहन का प्रेम रक्षाबंधन: प्यार और आदर का त्योहार

भूमिका

  • रिश्तों का जादू हमारे जीवन में एक खास महत्व रखता है, और भाई-बहन का प्रेम इन रिश्तों का एक मानवीय अंश है। रक्षाबंधन एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्व है जो इस प्रेम को मनाने का अवसर प्रदान करता है।

रक्षाबंधन का महत्व

एक विशेष पर्व

  • रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष रूप से तैयारी करती हैं और उन्हें राखी बांधती हैं, जो एक प्रतीक होता है कि वे हमेशा उनके साथ हैं।

प्यार और समर्पण

रक्षाबंधन के इस पर्व पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनके साथ वक्त बिताते हैं। यह उनके प्यार और समर्पण का प्रतीक होता है और उनके रिश्ते को मजबूती देता है।

भाई बहन का आपसी सम्बंध

साथी और सहायक

  • भाई बहन का रिश्ता एक आपसी समर्थन का प्रतीक होता है। वे एक दूसरे के साथ खुशियाँ और दुख बाँटते हैं और समस्याओं में आपसी सहायता करते हैं।

खेल और मनोरंजन

बचपन से ही भाई बहन एक साथ खेलते हैं और मिलकर मनोरंजन करते हैं। उनके बीच की मजाकियाँ और चुटकुले रिश्ते को और भी खास बनाते हैं।

रक्षाबंधन की रस्में और धारोहर

राखी का महत्व

रक्षाबंधन के दिन बहनें राखी बांधती हैं, जो एक पर्याप्त मात्रा में भगवान की आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।

उपहारों का आदान-प्रदान

इस खास मौके पर भाई बहन एक दूसरे को उपहार देते हैं। यह उनके आपसी स्नेह को दर्शाता है और रिश्तों को मजबूती देता है।

आखिरी विचार

  • रक्षाबंधन एक मानवीय भावना का प्रतीक है जो भाई बहन के प्यार को संजोने का अवसर प्रदान करता है। यह रिश्तों की महत्वपूर्णता को दर्शाता है और हमें एक-दूसरे के साथ समझदारी और समर्थन में बढ़ने का संदेश देता है।

 

क्या राखी बांधने से ही भाई-बहन का रिश्ता बनता है?

  • भाई बहन तो वह पहले से होते है । रक्षाबंधन भाई बहनों का त्यौहार है। इसमें बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती है भाई के सुखद भविष्य की कामना करती हैं वहीं भाई बहन की हर मुसीबत से रक्षा करने का वचन देता है।

किसी भी आदमी को राखी बांधने से वह भाई नही बन जाता। इस त्योहार का नाजायज फायदा आज कल के युवक और युवतियां उठाती है।

भाई-बहन का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन कब से प्रारंभ हुआ?

  • रक्षाबंधन हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक पवित्र व खूबसूरत त्योहार है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस दिन बहने अपने भाई की सूनी कलाई पर प्रेम का धागा बांधति है और भाई बहन की रक्षा करने का वादा करते हैं। वे एक-दूसरे को उपहार देते हैं।

मेरे अनुसार एक बहन को अपने भाई से वादा मांगना चाहिए –

  • कि वह उसकी हमेशा रक्षा करेगा।
    शादी के बाद जब भी वह (बहन) अपने मायके आए वह उसका पहले की तरह ही सम्मान करें।
    कभी बहन या उसके परिवार पर कोई मुश्किल आ जाए तब एक पिता की तरह ही भाई, बहन को छाया अथवा सहारा देगा।
    चाहे स्थिति जैसी भी हो भाई, बहन को कभी भी पराया हो जाने की बात नही कहेगा।

रक्षा बंधन के दौरान लोग भाई-बहन के बीच विशेष उपहार कौन-कौन से देते हैं और इसका क्या मतलब होता है?

रक्षा बंधन के दौरान लोग भाई-बहन के बीच विशेष उपहार देते हैं, जिनमें शामिल हो सकते हैं:

राखी:

राखी एक प्रमुख उपहार होती है जिसे बहन भाई की कलाई पर बांधती है। यह एक प्रतीक होता है कि बहन भाई की सुरक्षा की कवायद में है और भाई उसके संरक्षण का प्रतिज्ञान करता है।

तिलक और चावल:

बहन अपने भाई की माथे पर तिलक चढ़ाती है और उसे चावल देती है। यह उपहार दिव्यता और आशीर्वाद की प्रतीक होती है।

कागज के सिक्के:

बहन अपने भाई को कागज के सिक्के देती है, जिसका मतलब होता है कि भाई की आर्थिक समृद्धि और सफलता की कामना की जाती है।

चाँदनी और कुमकुम:

बहन अपने भाई की दीदारी के लिए उन्हें चाँदनी और कुमकुम देती है। यह भाई की लंबी आयु और खुशियों की कामना का प्रतीक होता है।

उपहार की थाली:

  • बहन एक विशेष उपहार की थाली तैयार करती है, जिसमें मिठाई, राखी, तिलक आदि शामिल होते हैं।
    खास मिठाई या स्नेक्स: बहन अपने भाई को उनकी पसंदीदा मिठाई या स्नेक्स देती है, जिससे भाई का मन खुश होता है।
    ये उपहार भाई-बहन के प्यार और संबंध को दर्शाते हैं और इसमें विशेष महत्व होता है क्योंकि ये उनके आपसी बंधन को मजबूत करते हैं।

 

 

 पहले किस बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी?

  • महाभारत में जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी अंगुली में चोट आ गई। द्रौपदी ने अपनी साड़ी को फाड़कर उनकी अंगुली पर पट्टी बांध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। भगवान श्रीकृष्ण ने इस उपकार का बदला चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर चुकाया।
  • एक अन्य प्रसंग के अनुसार रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा अपने राज्य पर हमला करने की सूचना मिली। रानी ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी। हुमायूं ने राखी की लाज रखी और बहादुरशाह के विरुद्ध युद्ध कर कर्मावती के राज्य की रक्षा की। कहा जाता है कि सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के शत्रु पुरू को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को नहीं मारने का वचन लिया। पुरू ने बहन को दिए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवन दान दिया।

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